सच की खोज" शिव मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि आत्मा की गहराई में उतरने का एक माध्यम है। यहाँ हम शिव की भक्ति के साथ-साथ मानव शरीर के सात चक्रों को जाग्रत करने का मार्ग दिखाते हैं। हमारा उद्देश्य है हर व्यक्ति को तन, मन और आत्मा से स्वस्थ, जागरूक और सत्य के पथ पर अग्रसर करना। हम क्या करते हैं:
क्या आपके मन में कोई सवाल है? क्या आप सेवा से जुड़ना चाहते हैं? या सिर्फ सच की खोज में हमारे साथी बनना चाहते हैं? तो हमसे बेझिझक संपर्क करें।
भारत तभी वास्तव में महान बन सकता है, जब कोई बीमार न हो, कोई भूखा न सोए, और कोई झूठ न बोले।
"सच की खोज" मंदिर का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि यह एक जागृति केंद्र है – जहाँ से सत्य, सेवा और स्वास्थ की रोशनी हर घर तक पहुँचे।
हम चाहते हैं कि लोग खुद की और समाज की सच्ची सेवा करें, और अपने जीवन को सत्य की राह पर ले जाएं।
जब मन सच्चा होता है, तो रास्ते अपने आप साफ हो जाते हैं।
“यह कोई साधारण मंदिर नहीं है – यह आपके शरीर, मन और आत्मा को जागृत करने का एक दिव्य स्थान है।
यहाँ केवल पूजा-पाठ नहीं होता, बल्कि ‘स्वयं की खोज’ होती है – जहाँ शिव की शक्ति से शरीर के अंदर छिपे सात चक्रों को जाग्रत करने की विधि सिखाई जाती है।
यह मंदिर आपको सिखाता है कि
सच्चा भगवान बाहर नहीं, हमारे अंदर है।
जब हम अपने अंदर के मूलाधार से लेकर सहस्रार चक्र तक की यात्रा शुरू करते हैं,
तो हम केवल एक भक्त नहीं रहते – हम एक साधक, एक जाग्रत आत्मा बन जाते हैं।
“सच की खोज” शिव मंदिर इस विश्वास पर आधारित है कि
जब हमारे चक्र संतुलित होते हैं, तो रोग दूर होते हैं, मन शांत होता है और आत्मा परम सत्य से जुड़ती है।
यह एक ऐसा स्थान है जहाँ ध्यान, मंत्र, शिव की आराधना और सात चक्रों की साधना के ज़रिए
हम अपने जीवन में स्वास्थ्य, सत्य और शांति ला सकते हैं।
यह केवल एक संयोग नहीं था, बल्कि एक दिव्य संकेत था कि जब आत्मा की शक्ति जागृत होती है, तो बाहरी संघर्ष भी शांत हो सकते हैं। यह मंदिर न केवल ध्यान और साधना का केंद्र है, बल्कि शांति, एकता और मानवता का प्रतीक बन चुका है। यहाँ शिव की ऊर्जा केवल भीतर के चक्रों को नहीं जाग्रत करती, बल्कि पूरे वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।
“सच की खोज शिव मंदिर” केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि आत्मा की जागृति का केंद्र है। यहाँ न तो कोई दान-पात्र है, न ही पैसों की माँग की जाती है।
क्योंकि इस मंदिर का विश्वास है कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए धन नहीं, श्रद्धा चाहिए। यहाँ केवल फूल, फल और वस्त्रों का दान स्वीकार किया जाता है — वो भी भक्तों की स्वेच्छा और सच्ची भावना से।
हम आपको आमंत्रित करते हैं कि आप यहाँ एक बार अवश्य पधारें, न किसी दिखावे के लिए, न किसी रीतिरिवाज़ के लिए — बल्कि अपने भीतर के सच्चे शिव को पहचानने के लिए।
यहाँ का वातावरण, मंत्रों की ध्वनि, ध्यान की शांति और सात चक्रों की साधना आपको एक नई दिशा में ले जाएगी।
यह मंदिर न तो किसी प्रचार का केंद्र है, न ही भीड़ का स्थान — यह एक निजी, शांत, और आध्यात्मिक यात्रा का आरंभ बिंदु है।
एक बार आइए, अनुभव कीजिए, और स्वयं निर्णय लीजिए — क्या वास्तव में ‘सच की खोज’ यहीं शुरू होती है।
"सच की खोज शिव मंदिर" एक ऐसा आध्यात्मिक स्थान है जहाँ शिव की आराधना के साथ-साथ मानव शरीर के सात चक्रों को जाग्रत करने की साधना कराई जाती है। यह मंदिर तन, मन और आत्मा – तीनों को शुद्ध करने का मार्ग दिखाता है। यहाँ से शुरू होती है सच्चे स्वास्थ्य, शांति और सत्य की यात्रा।
हम मानते हैं कि शरीर की बीमारी केवल दवा से नहीं, बल्कि सच्चे जीवन, सात्विक विचारों और आंतरिक शुद्धता से समाप्त होती है। और यह शुद्धता तभी आती है जब मनुष्य स्वयं को – अपने चक्रों को – पहचानता है।
शिव की आराधना के साथ-साथ हम लोगों को ध्यान, मंत्र और चक्र साधना सिखाते हैं, ताकि वे अंदर से जागरूक और शांत बन सकें।
हम समझाते हैं कि बीमारी का इलाज केवल गोली नहीं, बल्कि सही सोच, सही आहार और सकारात्मक जीवनशैली है। मंदिर में नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, योग, और आयुर्वेदिक सलाह दी जाती है।
हमारा प्रयास है कि हर बच्चा, हर बड़ा, सत्य बोलने, ईमानदारी से जीने और झूठ से दूर रहने की प्रेरणा पाए। झूठ, लालच और छल ही समाज के सबसे बड़े रोग हैं।
Gadpuri .dist.palwal.
+91 7292 000 366
"सच की खोज शिव मंदिर" का निर्माण संभव हो पाया है कुछ विशेष आत्माओं के सहयोग से, जिन्होंने तन, मन और धन से अपना योगदान दिया।
चक्र जागरण में विशेष मार्गदर्शन और साधना का नेतृत्व।
सुरेश अग्रवाल जी ने अपने गहन अध्यात्मिक अनुभव और गहरे साधना ज्ञान के माध्यम से,
मानव शरीर के सात चक्रों को जाग्रत करने की विधियों को सरल और प्रभावी तरीके से सभी तक पहुँचाया है।
उनकी दीक्षित साधना विधियों ने अनगिनत साधकों को
मूलाधार से लेकर सहस्रार तक की दिव्य यात्रा में सहायता प्रदान की है।
उनके मार्गदर्शन में साधक केवल ध्यान करना नहीं सीखते,
बल्कि वे अपने भीतर के छुपे हुए ऊर्जा स्रोत को पहचानते और सक्रिय करते हैं।
उनकी उपस्थिति स्वयं एक ऊर्जा का स्रोत है,
जहाँ शब्दों से अधिक उनका संकल्प और शांति साधकों के हृदय को स्पर्श करती है।
“शरीर के चक्रों को खोलना, आत्मा के द्वार खोलने जैसा है।
जब भीतर की ऊर्जा प्रवाहित होती है, तभी जीवन में सच्चा प्रकाश उतरता है।”
सच की खोज शिव मंदिर उनके दिव्य योगदान के बिना अधूरा होता।
मैं अर्चना कपानी
सबको कहना चाहती हूँ कि मैंने और मेरे परिवार ने मिलकर मेरे गुरु जी सुरेश अग्रवाल जी को पहले 27 लाख रुपया भेजा और अब दोबारा से हमने 16 लाख रुपया भेजा
हम चाहते थे की एक ऐसा मंदिर बने जिसमें सब अपनी इच्छाएँ पूर्ण कर सके जिसमें सबको सुकून मिले सब को शांति मिले और इस कार्य के लिए अगर हम किसी पर विश्वास कर सकते थे तो वो हैं सिर्फ़ गुरुजी क्योंकि मैं उन्हें ख़ास कर मैं उन्हें क़रीब १८ साल से जानती हूँ और इन 18 साल में मैंने सिर्फ़ यही देखा कि वो सबकी सहायता करते हैं कभी उन्होंने अपने स्वार्थ है तो कुछ नहीं किया मैं इतना जानती हूँ कि जब जब मुझे किसी बात की आवश्यकता हुई तो मैंने उन्हें ही याद किया और उन्होंने मेरी हर बात को पूर्ण किया। ये बात अलग है कि मैंने कभी कोई नाजायज़ इच्छा नहीं की जो भी मेरी सही इच्छा थी मेरे गुरु जी ने पूर्ण की
और इसी मक़सद से मेरी और मेरे परिवार की यही इच्छा थी कि एक ऐसा स्थान तैयार हो जहाँ मेरे गुरु जी बैठे लोगों से मिले और उन्हें सही मार्ग की ओर अग्रसर कर सकें क्योंकि वह दुनिया में शांति चाहते हैं , दुनिया को नशा मुक्त करना चाहते हैं दुनिया से ग़रीबी हटाना चाहते हैं और इसी मक़सद को पूर्ण करने के लिए हम सबने मिलकर उनकी सहायता की परंतु बहुत अफ़सोस होता है कि हमारे भारत जैसे देश में जब गुरु जी जैसा इंसान किसी को पैसा देते हैं और सामने वाला व्यक्ति उसे हज़म करके बैठ जाता है जैसा कि ठेकेदार महिपाल सिंह ने किया
गुरुजी चाहते तो उसे सजा दे सकते थे , स्वयम सजा दे सकते थे परंतु उन्होंने नहीं किया वह यही सोचते रहे कि क़ानून के द्वारा इस मुसीबत का समाधान किया जाए ताकि वो इंसान किसी और को नुक़सान न पहुँचाएँ और इसके साथ साथ दुनिया के सामने उसका असली चेहरा आ सके परन्तु किसी ने उनकी सहायता नहीं की हम लोग दूर बैठे हैं , हम कुछ नहीं कर सके यहाँ से , लेकिन जो लोग हमारे अपने देश में बैठे हैं उन्होंने भी कोई सहायता नहीं की परन्तु फिर भी गुरु जी की इच्छा थी कि जो हो वह क़ानूनी तौर पर हो वह स्वयं किसी को सज़ा नहीं देना चाहते अंततः मेरी आप सब से एक ही विनती है कि अगर हो सके तो गुरुजी को सहायता कीजिए ताकि वह क़ानूनी तौर पर महिपाल सिंह का चेहरा सबके समक्ष ला सके और हमारा दूसरा मंदिर भी बनकर तैयार हो सके जिसमें कि सबको सही गुण की प्राप्ति हो
आप सभी का धन्यवाद और सभी को नमन
अर्चना कपानी
वर्जीनिया यूनाइटेड स्टेट
+15715380163
मेरा नाम मोहन कपानी है। मेरा जन्म अगस्त 1930 में भारत (अब पाकिस्तान का हिस्सा) में हुआ था। मैंने हाई स्कूल के बाद स्वअध्ययन द्वारा गणित सीखा और 1953 में पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
1961 में भारत छोड़ने के बाद मैंने कुछ समय ब्रिटेन में बिताया और फिर 1965 में अमेरिका में बस गया। वहाँ मैंने मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में एक सफल कंपनी का संचालन किया। वर्ष 2000 में 70 वर्ष की आयु में मैंने सेवानिवृत्ति ली।
लगभग चार वर्ष पहले मेरी भेंट श्री सुरेश अग्रवाल जी से हुई। मैं यह जानकर अत्यंत चकित रह गया कि उनके पास भारत की प्राचीन और रहस्यमयी हीलिंग विद्या (चक्र जागरण, मंत्र, मुद्रा) का विशेष ज्ञान है। वे सरल से लेकर जटिल बीमारियों तक का इलाज मंत्रों और मुद्राओं के माध्यम से करते हैं। मैंने अपने कुछ शिक्षित साथियों के साथ इस विद्या का अनुभव किया और हम सभी को उनके चमत्कारी उपचारों से अत्यधिक लाभ हुआ।
कुछ समय बाद सुरेश जी ने इच्छा जताई कि वे इस विद्या को औरों तक पहुँचाना चाहते हैं, और इसके लिए एक समर्पित स्थान – एक मंदिर की आवश्यकता है।
मैंने इस उद्देश्य को पूर्ण समर्थन दिया और मंदिर के निर्माण हेतु ₹21 लाख की राशि प्रदान की।
दुर्भाग्यवश, निर्माण कार्य के लिए जिन ठेकेदारों को चुना गया, उन्होंने कार्य अधूरा छोड़ दिया और घटिया निर्माण करके चले गए। लेकिन मैं रुका नहीं।
मैंने पुनः ₹21 लाख की सहायता देने का निश्चय किया ताकि यह मंदिर पूरी श्रद्धा और उद्देश्य के साथ पूर्ण हो सके।
मुझे अत्यंत संतोष है कि यह कार्य अब सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है और शीघ्र ही पूर्ण हो जाएगा।
“शिव मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं — यह सत्य, सेवा और साधना का एक जीवंत केंद्र है।
इसे बनाना मेरा सौभाग्य है।”
"अगर हर इंसान खुद को जान ले, तो न कोई बीमार होगा, न कोई भूखा, और न कोई असत्य बोलने वाला बचेगा। सच की खोज हर आत्मा की जरूरत है – और यही हमारी दिशा है।"